मेघा की शादी को अभी 3 महीने ही हुए थे कि तीज का त्यौहार आ गया . मेघा कॉलेज से ही रुढ़िवादी विचारधाराओं की विरोधी महिलानेत्री थी इसलिए वो इन सब की घोर विरोधी थी. नई नई शादी होने की वजह से वो खुलकर विरोध भी नहीं कर पा रही थी इसलिए वो बहुत असमंजस की स्थिति में थी कि कैसे अपने पति राजेश को वो अपनी बात समझाए उधर सासु माँ उसकी तीज की पूजा की तैयारियों में जुटी थी. क्योंकि कल तीज का व्रत था.
राजेश शाम को ऑफिस से आया तो बहुत खुश था मेघा किचन में सासु माँ के साथ उनकी मदद करवा रही थी राजेश ने मेघा को कमरे में बुलाया बड़े प्यार से उसके कन्धों से पकड़ कर बिस्तर पर बैठाया और बोला तुम कल अपना पहला तीज का व्रत रख रही हो और ये न सिर्फ पति की लम्बी उम्र के लिए रखा जाता है बल्कि घर परिवार की खुशहाली के लिए भी रखा जाता है इसलिए मै तुम्हारे लिए ये गिफ्ट लाया हूँ कहते हुए उसने छोटा का सोने का लोकेट जिस पर दोनों का नाम लिखा था उसके हाथों में दे दिया और बोला देखो हम दोनों एक है इसलिए व्रत हम दोनों का होगा और निर्जल नहीं होगा. कल की मैंने भी ऑफिस से छुट्टी कर ली है कल का दिन हम दोनों साथ साथ मनाएंगे. हम दोनों पति पत्नी हैं इसलिए हमारे सारे सुख और दुःख साथ हैं
वो एकतरफा ही बोलते बोलते अचानक चुप हो गया और थोड़ी देर मेघा को देखकर बोला सॉरी मेघा ये सिर्फ मेरे विचार थे अब तुम कहो तुम्हें क्या करना है तुम्हे कैसा अच्छा लगता है मैं अपने मन की तुमसे कह तो सकता हूँ लेकिन तुम पर अपनी बातें थोप नही सकता. इतना सुनते ही मेघा के चेहरा ख़ुशी से खिल उठा और उसने अपनी दोनों बाहें राजेश के गले में डालते हुए कहा जब आप मेरे साथ हैं तो मैं भी आपके साथ हूँ तीज की बहुत बहुत शुभ कामनाएं
सरिता पन्थी

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