चाहत के दीप
जब भी तुमको पास में अपने पाते हैं
चाहत कर हम सौ सौ दिये जलाते हैं
कौन डगर है जिस पर हमको चलना है
कौन से रस्ते तुम तक लेकर जाते हैं
आग लगाते हैं वो खुद आगे बढ़कर
दामन अपना क्यों फिर वही बचाते हैं
याद हमें करते हैं वो भी छुप छुपकर
हम पूछें तो कहने से शर्माते हैं
करते हैं वो बात बहाने से जब भी
सच्चे झूठे किस्से कई सुनाते हैं
आते हैं वो याद हमें जब रह रहकर
दिल से अपने कैसे हमें भुलाते हैं
जब भी तुमको पास में अपने पाते हैं
चाहत कर हम सौ सौ दिये जलाते हैं
कौन डगर है जिस पर हमको चलना है
कौन से रस्ते तुम तक लेकर जाते हैं
आग लगाते हैं वो खुद आगे बढ़कर
दामन अपना क्यों फिर वही बचाते हैं
याद हमें करते हैं वो भी छुप छुपकर
हम पूछें तो कहने से शर्माते हैं
करते हैं वो बात बहाने से जब भी
सच्चे झूठे किस्से कई सुनाते हैं
आते हैं वो याद हमें जब रह रहकर
दिल से अपने कैसे हमें भुलाते हैं