मंगलवार, 18 मई 2021

एजुकेटेड कोरोना

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एजुकेटेड कोरोना

 आजकल रात दिन घर में, टीवी में,अखबार में, .मोबाइल में हर जगह बस कोरोना ही चलता रहता है, जब हम इसी के बारे में बात करते रहते हैं तो चाहते न चाहते भी यही हमारे दिलों दिमाग में चलता रहता है तो जैसा कि हम सब जानते हैं जब 2020 अप्रैल से इस महामारी का प्रकोप शुरू हुआ, उस समय कोई नहीं जानता था कि ये कब तक चलेगा और इसकी कितनी लहरें आएंगी लेकिन 2020 के खत्म होते होते ये काफी शांत हो गया था और लोग अपनी पुरानी जीवन शैली मे वापस लौटने लगे थे अभी ठीक से वापसी भी नहीं हो सकी थी कि दूसरी लहर का प्रकोप शुरू हो गया, आप सोचते होंगे कि इसमें नया क्या है ? ये तो सभी को मालूम है, जी हाँ ये सभी को मालूम है और ये भी कि अब तीसरी लहर भी कई जगहों पर शुरू हो चुकी है जिसका शिकार छोटे बच्चे बन रहे है   




      इसकी पहली लहर बुजुर्गों पर भारी रही और दूसरी लहर में हमने अपने युवा कर्णधारों को खोया है, मैं विज्ञान की विद्यार्थी नही हूँ और न ही मुझे इसकी इतनी समझ है लेकिन इतना जरूर पता है ब्लड प्रेशर अलग कारणों से, तो निमोनिया के अलग ही कारण होते हैं डायबिटीज़ के अपने अलग कारण हैं, तो टीवी के अलग और हर बीमारी के होने के अपने अलग कारण और अलग अलग शारीरिक अवस्था होती है| कोई भी बीमारी एक निश्चित कमी कमजोरी वाले शरीर पर ही आक्रमण करती है लेकिन यह पहली बीमारी या वाइरस है जो एक खास उम्र के लोगों को संक्रमित या टार्गेट करता है  इतना पढ़ा लिखा और समझदार वाइरस जिसने इन्सानों को उनकी उम्र के हिसाब से जीवन के तीन चरणों मे विभाजित किया और संक्रमित किया जैसे आपने कोई सोफ्टवेयर बनाया और उसमें फीड कर दिया पहला लेवल बुजुर्ग दूसरा जवान और तीसरा बच्चे| क्या इतिहास में कोई ऐसा वाइरस आया कभी ? हम सिर्फ अपनी और अपनों की जान बचाने में लगे हैं और यही सबसे जरूरी भी है लेकिन इस वाइरस की गतिविधियाँ शंकास्पद हैं और वैज्ञानिकों को इसकी छानबीन अवश्य करनी चाहिए क्योंकि समय समय पर मीडिया इसके जैविक हथियार होने की पुष्टि भी कर रहा है और इसके स्वभाव, इसकी गतिविधियों से भी यही प्र्मणित हो रहा है कि यह एक पढ़ा लिखा और  शिक्षित वाइरस है |

सरिता पंथी