शनिवार, 23 फ़रवरी 2019

खुद ही रूठे और खुद ही मना लेते है


 खुद ही रूठे और खुद ही मना लेते है


खुद ही रूठे और खुद ही मना लेते है
दिल जब रोता है तो खुद ही हंसा लेते है

सुनी हो जाती है जब कभी आँखें
आंसुओं से सजा लेते है

भर जाता है जब दिल दर्द से
मुस्कराहट होठों पे सजा लेते है

अपने गम का हम खुद ही
जी भरके मज़ा लेते है

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