चालीस पार के भटकते कदम
यूँ तो ये वो उम्र है जब
व्यक्ति स्थायित्व प्राप्ति के निकट पहुँच चुका होता है . शादी हो चुकी होती है और
बच्चे स्कूल की दौड़ में शामिल ..लेकिन पति पत्नी के आपसी रिश्तों की बात करें तो
ये वो उम्र होती है जब पत्नी घर और बच्चों में व्यस्त होने के कारण पति के प्रति न
चाहते हुए भी उदासीन हो चुकी होती है . नौकरीपेशा अगर न भी हो तो भी घर में सास
ससुर, बच्चे और घर का इतना काम होता है कि उसे अपने बारे में सोचने का समय नही मिल
पता ऐसे में पति के दिलों दिमाग में क्या चल रहा है या उसकी शारीरिक, मानसिक
आवश्यकताएं क्या है इस बारे में सोचने के लिए उसके पास समय ही नहीं होता . लेकिन
शरीर तो शरीर है और उसकी आवश्यकताएं भी यथावत ही रहेंगी .
हमारे समाज में हमें
अनेकों ऐसे उदाहरण मिल जायेंगे जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि अतृप्त और
असंतुष्ट तन मन लेकर पुरुष भटकने लगता है. समाज का एक बड़ा पुरुषवर्ग ऐसा है जो इस
भटकाव में शामिल है . ये किसी भी भीड़ भरी जगह पर अपने मचलते हाथों को रोक नहीं
पाते हैं किसी सुन्दर स्त्री को देखते हैं
तो ऐसे देखते हैं जैसे आँखों से ही राल टपक रही हो और ये ही पुरुष अपने घर परिवार में,
आस पड़ोस में, शादी ब्याह में या फिर ऑफिस में अपनी अतृप्त यौन कुंठा को साधते नज़र
आते हैं . डर हमें आजकल की युवा पीढ़ी से
नहीं है आजकल की युवा पीढ़ी हमारी पीढ़ी से कहीं ज्यादा समझदार और जिम्मेदार है डर
हमें उस अधेड पुरुष वर्ग से है जो घर पर सब कुछ होते हुए भी बाहर भटकने पर मजबूर
है क्यूंकि उसे नही सिखाया गया बचपन से जिम्मेदारियों को बांटना, पत्नी का हाथ
बंटाना जिसके चलते पत्नी पर काम का एकतरफा बोझ उसे पति के बारे में सोचने का मौका
नहीं देता और पति के पास भटकाव के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं रह जाता . आँखे तब
खुलती हैं जब दुर्घटना घट चुकी होती है
हमें इस समस्या को गंभीर
रूप से लेते हुए इस के दुष्परिणाम से बचने के भरसक प्रयास करना होगा और पुरुषों की
इस मनः स्थिति में सुधार लाकर समाज को स्वच्छ बनाना होगा . घर एक ऐसी जगह है जहाँ
अगर सभी सदस्य एक साथ बैठकर दिलो दिमाग खोलकर एक आपस में विचार विमर्श करें तो हर
समस्या का समाधान निकल सकता है .
सरिता पन्थी


Maine akasr dekha hai shaadi se phele to pyar wali kafi badi badi baatin ki jati hai aur shaadi ho jane ke kuch month baad wife par pabandi laga dena gali dena mar pitayi karna jaise shaadi nhi ki ho balki usko karid liya hai aur khud jo chehe wo karin agar shaadi ke baad wife ke sath best friend jaisa rista ho to kabhi ladayi nhi ho sakti wife aur hubby jab apne room mai ho to sirf romantic baatin honi chahiye wife ke man ko bhi padna chahiye yeh mera apna manaa hai
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